श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपती मंदिर,पुणे

महत्वपूर्ण जानकारी

  • स्थान: गणपति भवन, २५०, बुधवार पेठ पुणे महाराष्ट्र ४११००२।
  • त्योहारों:गणेश चतुर्थी
  • मुख्य देवता: ग़णपती
  • भाषाओं: अंग्रेजी, मराठी और हिंदी
  • दर्शन का समय: सु. 0६:00 से रात के 11:00 बजे तक
  • जानेका का सबसे अच्छा समय: पूरे साल ।

श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपती को पुणे शहर के गौरव का उच्चतम स्थान माना जाता है । हर साल भारत भर के और देश विदेशों के अनगिनत भक्त इस भगवान के दर्शन पाने के लिये आते हैं ।हर साल भारत भर के और देश विदेशों के अनगिनत भक्त इस भगवान के दर्शन पाने के लिये आते हैं ।यह मंदिर भक्तों के आदर और भक्ती का स्थान तो है ही, पर इतना ही नहीं, बल्कि समाज-सेवा और संस्कृति-संवर्धन के लिए प्रयत्नशील रही हुई एक महत्त्वपूर्ण संस्था के रूप में भी लोग इसे जानते हैं ।

इतिहास

इस मंदिर के पीछे एक बहुत बडी और वैभवशाली परंपरा रही है । कई साल पहले अपना इकलौता बेटा प्लेग में खोने के बाद श्रीमंत दगडूशेठ और उनकी पत्नी लक्ष्मीबाई, इन दोनों ने इस गणेश मूर्ती की स्थापना की थी । उसके बाद अब हर साल ना केवल श्री दगडूशेठ का परिवार बल्कि आसपास के सभी लोग भाव-भक्ती से और बडे जोश के साथ गणेशोत्सव मनाते रहे ।

तब अपनी जवान उम्र में तात्यासाहेब गोडसे इस गणेश-उत्सव के एक उत्साही कार्यकर्ता थे । बाद में जब लोकमान्य तिलकजी ने आजादी के संघर्ष में लोगों को इकट्ठा करने के लिये गणेशोत्सव को सार्वजनिक उत्सव का रूप दिया तब दगडूशेठ गणपती को सर्वाधिक लोकप्रियता का सम्मान प्राप्त हुआ । १९५२ में दगडूशेठ हलवाई गणपती मंदिर उत्सव के अनुशासन की जिम्मेदारी तात्यासाहेब और उनके मित्र-परिवारपर आ पडी । तात्यासाहेब के मार्गदर्शन में उसके सहयोगी मामासाहेब रासणे, श्री. शंकरराव सूर्यवंशी और श्री. के. डी. रासणे इन लोगो ने यह जिम्मा खूब अच्छी तरह निभाया और उसके बाद यह सिलसिला कभी रुका ही नहीं । उदार दानी व्यक्ती और भक्त मंदिर के दान-पात्र में बहोत उदारता के साथ अपना दान देते रहे ।

तब तात्यासाहेब और उनके मित्र-परिवार ने सोचा, कि इस निधी से अपनेही बांधवोंकी सेवा करने से बढकर ईश्वरसेवा और क्या हो सकती है? इस ध्येय से प्रेरित इन युवकों ने उत्सव के कार्य की व्याप्ती परंपरा प्राप्त पूजा विधी के आगे ले जाकर सामाजिक और सांस्कृतिक विकास के क्षेत्र में कदम रखा । मंदिर में किये जानेवाले धर्मकार्य तो पूरे तामझाम से होते ही रहे, पर इन्होंने अपने राज्य के सामाजिक और राजनैतिक प्रश्नों की ओर भी अपना ध्यान मोडा।

आर्कीस्टक्चर

यह मंदिर एक सुंदर निर्माण है और १०० से अधिक वर्षों का समृद्ध इतिहास समेटे हुए है। जय और विजय, संगमरमर से निर्मित दो प्रहरी, शुरुआत में सभी का ध्यान आकर्षित करते हैं। निर्माण इतना सरल है कि मंदिर में सुंदर गणेश मूर्ति के साथ-साथ सभी कार्यवाही को बाहर से भी देखा जा सकता है। गणेश की मूर्ति २.२ मीटर ऊंची और १ मीटर चौड़ी भी है। इसे करीब ४० किलो सोने से सजाया गया है। भगवान गणेश के भक्त उन्हें सोने के साथ-साथ धन की पेशकश करते हैं और साथ ही साथ भगवान को हर प्रदान करने के साथ-साथ अमीर भी होते हैं। इसके अलावा, देवता को चढ़ाए गए नारियल के ढेर अभी तक मंदिर का एक अतिरिक्त कार्य हैं।

दैनिक पूजा, अभिषेक और भगवान गणेश की आरती भी शामिल होने लायक है। गणेश उत्सव के दौरान मंदिर की रोशनी अद्भुत होती है। श्रीमंत दगदूशेठ गणपति ट्रस्ट मंदिर के रख-रखाव के काम देखते है। मंदिर शहर के केंद्र में स्थित है, स्थानीय खरीदारी बाजार भी पास है। संगीत समारोह, भजन, और अथर्वशीर्ष पाठ जैसी विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियां ट्रस्ट द्वारा आयोजित की जाती हैं।

श्री दत्ता मंदिर को बुधवार पेठ में रखा गया था, पुणे उनका आवासीय भवन था। दगडूसेठ के पोते गोविंदसेठ भी अपनी दयालुता और उदारता के लिए लोकप्रिय थे। पुणे में गोविंद हलवाई चौक उनके नाम से प्रसिद्ध है।
बाद में उन्होंने हलवाई गणपति ट्रस्ट का विकास किया। बाल गंगाधर तिलक, ब्रिटिश राज के दौरान, सार्वजनिक सभाओं को प्रतिबंधित करने वाले आदेश प्राप्त करने के तरीके के रूप में गणेश उत्सव समारोह को सार्वजनिक रूप प्रदान करते थे।

महत्व

यह मंदिर माहाराष्‍ट्र के सुंदर नगर पुणे में है। वैसे तो यहां आप साल के किसी भी महीने में आ सकते हैं, मगर गणेश उत्‍सव के समय इस मंदिर में भक्‍तों की रौनक और आलीशान सजावट देखते ही बनती है।

मुख्य भक्त

दगड़ूसेठ नाम का एक प्रसिद्ध हलवाई था, जिसने इस मंदिर का निर्माण कराया था। तब से इस मंदिर को दगड़ूसेठ हलवाई के नाम से ही भक्‍तों ने पुकारना शुरू कर दिया था। 

प्रतिमा

दगड़ूसेठ हलवाई गणपति मंदिर में भगवान गणेश की ७.५ फीट ऊंची और ४ फीट चौड़ी प्रतिमा रखी गई है। इस प्रतिमा के केवल चेहरे पर ही ८ किलो सोने का काम किया गया है। इस प्रतिमा के में गणपति के दोनों कान सोने के हैं। प्रतिमा को ९ किलो से भी अधिक वेट का मुकुट पहनाया गया है। देश में मौजूद सभी गणेश प्रतिमाओं में से यह प्रतिमा बेहद खूबसूरत है और इस मंदिर में गणेश जी को हैवी सोनी की ज्‍वेलरी से सजाया गया है।

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त्यौहार

  • प्रमुख त्योहार गणेश चतुर्थी है
  • विनायकी चतुर्थी (विनायकी चतुर्थी हिंदू कैलेंडर माह के शुक्ल पक्ष का चौथा दिन है।)
  • संकष्टी चतुर्थी (संकष्टी चतुर्थी हिंदू कैलेंडर माह के शुक्ल पक्ष का चौथा दिन है।)

आस-पास के देखने लायक जगह

  • अमनोरा मॉल
  • कवादी पट
  • गोता घाट घाटी

यहाँ कैसे पहुँचे

  • हवाई मार्ग द्वारा: अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 12 किमी.
  • ट्रेन द्वारारेलवे स्टेशन से 4 किमी दूर
  • सड़क मार्ग द्वारा: कई बस स्टॉप आसपास के क्षेत्र में हैं, केवल कुछ सौ मीटर दूर हैं। मंदिर तक पहुंचने के लिए पुणे की शीर्ष कार रेंटल कंपनियों से एक निजी टैक्सी बुक करें।

मंदिर का समय

सार्वजनिक दर्शन का समय

सुबह के दर्शन का समय दोपहर के दर्शन का समय शाम के दर्शन का समय
सु. ६.०० से ७.३० दो. २.०० से ३.००रा. ८.१५ से १०.००
सु. ८.१५ से १.३०३.१५ से रात ८.००रा. १०.४५ से ११.००

पूजा का समय

सोमवार से रवीवार तक 06:00 AM to 11:00 PM
सुबह ६.००मंदिर खुलेगा
सु. ७.३० से ७.४५सुप्रभातम आरती (सुबह की आरती या प्रार्थना)
दो. १.३० से २.००भोग आरती
दो. ३.०० से ३.१५मद्ध्यदिन आरती
रा. ८.०० से ९.००महामंगल आरती
रा.१०.३० से १०.४५शेज आरती
रा. ११.००मंदिर बंद
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